Environmental Pollution Essay In Hindi-पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध

Environmental Pollution Essay In Hindi

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विज्ञान के इस युग में मानव को जहां कुछ वरदान मिले है, वहां कुछ अभिशाप भी मिले हैं। प्रदूषण एक ऐसा अभिशाप हैं जो विज्ञान की कोख में से जन्मा हैं और जिसे सहने के लिए अधिकांश जनता मजबूर हैं।प्रदुषण से पृथ्वी दूषित होती है और उसका संतुलन भी बिगड़ जाता है। हम लोग एक प्रदूषित दुनिया में रह रहे हैं जहाँ पर वायु, जल , भोजन सभी चीजे दूषित हैं। मनुष्य प्रजाति प्रदुषण को उत्पन्न करने में सबसे अहम योगदान दे रही है।

लोग पॉलीथीन और पेट्रोलियम जैसी चीजों का प्रयोग अधिक करते जा रहे हैं जिसकी वजह से पर्यावरण को बहुत हानि हो रही है। वैज्ञानिकों द्वारा भी पर्यावरण प्रदुषण को सूचीबद्ध किया गया है और हमारी सरकार भी इस विषय में बहुत चिंतित है।

प्रदूषण का अर्थ : प्रदूषण का अर्थ है -प्राकृतिक संतुलन में दोष पैदा होना। न शुद्ध वायु मिलना, न शुद्ध जल मिलना, न शुद्ध खाद्य मिलना, न शांत वातावरण मिलना।

प्रदुषण के प्रकार : कहा जाए तो मोटे तौर पर पर्यावरण के मुख्य तीन घटक होते हैं – अजैविक या निर्जीव , जैविक या सजीव और ऊर्जा घटक। अजैविक या निर्जीव घटक स्थलमण्डल हैं, जैविक या सजीव रहने वाले घटक पौधों , जानवरों और मनुष्य सहित प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और ऊर्जा घटक जैसे – सौर ऊर्जा , पनबिजली , परमाणु ऊर्जा आदि विभिन्न जीवों के रखरखाव हेतु बहुत जरूरी हैं। पर्यावरण प्रदुषण 6 तरह का होता है –

  1. जल प्रदुषण
  2. ध्वनि प्रदुषण
  3. वायु प्रदुषण
  4. भूमि प्रदुषण
  5. प्रकाश प्रदुषण
  6. उष्मीय प्रदुषण।

प्रदुषण का कारण : 

मनुष्य जाति इस स्थिति के लिए खुद ही जिम्मेदार है। क्योंकि मनुष्य जाति ऐसी बहुत सी वस्तुओं का प्रयोग कर रही है जिसे बनाने के लिए बहुत हानिकारक पदार्थों का प्रयोग किया जाता है और जब ये चीजें फालतू बच जाती हैं तो इन्हें फेंक दिया जाता है जिसकी वजह से हानिकारक कैमिकल्स आस-पास के वातावरण में फैलने लगते हैं और पर्यावरण को प्रदूषित कर देते हैं।

प्रदुषण की समस्या को बड़े-बड़े शहरों में ज्यादा देखा जाता है क्योंकि वहाँ पर 24 घंटे कारखानों का और मोटर गाड़ियों का धुआँ बहुत ज्यादा मात्रा में फ़ैल रहा होता है जिसकी वजह से लोगों को साँस लेने में बहुत समस्या होती है। मनुष्य अपनी प्रगति के लिए वृक्षों को अँधा-धुंध काटता जा रहा है जिसकी वजह से प्रदुषण की मात्रा बढती जा रही है।

मनुष्य प्रकृति से मिले इस अमूल्य धन को व्यर्थ ही नष्ट करता जा रहा है। पर्यावरण में कार्बन-डाई-आक्साइड की अधिक मात्रा हो गई है जिसकी वजह से धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है। धरती के तापमान बढने की वजह से ओजोन परत को हानि हो रही है जिसके कारण सूर्य की किरण सीधी धरती पर पहुंचने लगीं हैं और मनुष्य को अलग-अलग तरह की बीमारियाँ हो रही हैं।

पर्यावरण प्रदुषण हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं। यह ग्लोबल वार्मिंग में वृद्धि का एक कारण होता है। पिछले दशक से पर्यावरण बहुत अधिक बढ़ गया है। लेखकों ने भी पर्यावरण प्रदुषण पर निबंध लेखन का काम शुरू कर दिया है।

प्रदुषण सभी तरह से पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है और जीवन की परिस्थिति को भी प्रभावित कर रहा है। मनुष्य की मूर्खता की वजह से पृथ्वी का प्राकृतिक सौन्दर्य दिन-प्रतिदिन खराब होता जा रहा है।

प्रभाव और समस्या : 

मीलों ,मोटर वाहनों ,कारखानों ,  कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के द्वारा जो कार्बन-मोनो-आक्साइड गैस से जो अपशिष्ट और धुआँ निकलता है उसे कृषि में उपयोग किया जाता है , नालियों का धूल जल और वनों की कटाई की वजह से भी पर्यावरण प्रदुषण की समस्या बढती जा रही है।

आज के समय में पर्यावरण प्रदुषण देश की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है। यह केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि एक अंतर्राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। वर्तमान समय में हम इस समस्या की वजह से सुखी और शांति पूर्ण जीवन व्यतीत नहीं कर पाएंगे। जब भी हम एक समाचार पत्र पढ़ते हैं उस समाचार पत्र में पर्यावरण प्रदुषण के पक्षों को देखा जा सकता है।

यह केवल एक मनुष्य को नहीं बल्कि पुरे देश को नुकसान पहुंचता है और अगर यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढती गई तो भारत को एक बहुत ही गंभीर समस्या का सामना करना पड़ेगा। जो देश विकसित होता है वहाँ पर इस तरह की समस्या बहुत ही दुर्लभ होती है।

हमारे देश का प्रत्येक मनुष्य इस समस्या को महसूस करता है लेकिन कोई भी इसे हटाने के लिए कोशिश नहीं करता है। पर्यावरण प्रदुषण के खराब प्रभाव बहुत ही हानिकारक होते हैं। पर्यावरण प्रदुषण से हमारी सामाजिक स्थिति खंडित हो जाती है। दुनिया में प्राकृतिक गैसों का संतुलन बना रहना बहुत जरूरी होता है लेकिन मनुष्य अपने स्वार्थ के लिए पेड़ों की अँधा-धुंध कटाई कर रहे हैं।

अगर यहाँ पर कोई पेड़ ही नहीं रहेगा तो पेड़ कार्बन-डाई-आक्साइड को ग्रहण नहीं कर पाएंगे और ऑक्सीजन को छोड़ नहीं पाएंगे। ऐसे में पेड़ों के प्रतिशत की बहुत अधिक मात्रा में खपत हो जाएगी। कार्बन-डाई-आक्साइड की वजह से ग्लोबल वार्मिंग की समस्या अधिक बढ़ जाएगी।

अगर प्राकृतिक संसाधनों से छेड़छाड़ की जाती है तो वह प्राकृतिक आपदाओं का कारण बनती है। हम लोग औद्योगिक विकास की वजह से अपने स्वभाव को भूल गये हैं जिसकी वजह से आज हमें विभिन्न प्रकार के रोगों ने घेर लिया है जागरूकता लाने के लिए विकास की बहुत आवश्यकता है।

अस्तित्व प्रणाली भी जीवन के लिए एक खतरनाक प्रणाली बनती जा रही है। इसी वजह से बहुत सी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न होती जा रही हैं। वायु प्रदुषण की वजह से साँस लेने से फेफड़ों और श्वसन के रोग उत्पन्न होते जा रहे हैं। जल प्रदुषण की वजह से पेट की समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

जल प्रदुषण की वजह से गंदा पानी पी रहे जानवरों की भी मृत्यु हो रही है। ध्वनि प्रदुषण की वजह से मानसिक तनाव , बहरापन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है चारों तरफ चिंता और अशांति छा जाती है।

प्रदुषण का समाधान : 

प्रदुषण से पर्यावरण को बचाने के लिए जल्द नियंत्रण की जरूरत है। वनीकरण की तरफ अधिक ध्यान दिया जाना चाहिए। हो सके तो पेड़ों की कम-से-कम कटाई की जानी चाहिए। पर्यावरण प्रदुषण के लिए सरकार को उचित कदम उठाने होंगे और इसके विरुद्ध नए कानून जारी करने होंगे।

केवल सरकार ही नहीं बल्कि राजनेताओं , विचारकों , सामाजिक कार्यकर्ताओं और भारत के प्रत्येक मनुष्य को इसे दूर करने के बारे में अधिक जागरूक होना होगा। जागरूकता लाने के लिए विकास की बहुत आवश्यकता है। आधुनिक युग के वैज्ञानिकों में प्रदुषण को खत्म करने के लिए बहुत से पयत्न किये जा रहे हैं।

हर मनुष्य को सोचना चाहिए कि कूड़े के ढेर और गंदगी के आस-पास जल स्त्रोत या जलाशय न हों। मनुष्य को कोयला और पेट्रोलियम जैसे उत्पादों का बहुत कम प्रयोग करना चाहिए और जितना हो सके प्रदुषण से रहित विकल्पों को अपनाना चाहिए। मनुष्य को सौर ऊर्जा , सीएनजी , वायु ऊर्जा , बायोगैस , रसोई गैस , पनबिजली का अधिक प्रयोग करना चाहिए ऐसा करने से वायु प्रदुषण और जल प्रदुषण को कम करने में बहुत सहायता मिलती है।

जो कारखाने पहले ही बन चुके हैं उन्हें तो हटाया नहीं जा सकता है लेकिन सरकार को आगे बनाने वाले कारखानों को शहर से दूर बनाना चाहिए। ऐसे यातायात साधनों को प्रयोग में लाना चाहिए जिससे धुआं कम निकले और वायु प्रदुषण को रोकने में मदद मिल सके। पेड़-पौधों और जंगलों की कटाई पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।

नदियों के जल को कचरे से बचाना चाहिए और पानी को रिसाइक्लिंग की सहायता से पीने योग्य बनाना चाहिए। प्लास्टिक के बैगों का कम प्रयोग करना चाहिए और जिन्हें रिसाइकल किया जा सकें उनका प्रयोग अधिक करना चाहिए। प्रदुषण को खत्म करने के लिए कानूनों का पालन करना चाहिए।

प्रदुषण की रोकथाम : 

अगर मनुष्य पृथ्वी पर जीवित रहना चाहता है तो पर्यावरण को प्रदूषित न होने दे और अपने आस-पास के वातावरण को साफ और स्वच्छ रखने की हर मुमकिन कोशिश करे। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता का भाव पैदा करना चाहिए। मनुष्य को जितना हो सके अधिक-से-अधिक पेड़ पौधे लगाने चाहिएँ। वैज्ञानिकों द्वारा धुम्रपान को कम करने के उपाय को खोजा जा रहा है। संसार के सभी लोगों को मिलकर पर्यावरण प्रदुषण को रोकने की कोशिश करनी चाहिए।

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