Kisaan aur Jameendaar

Kisaan aur Jameendaar Story जमींदार और किसान

Kisaan aur Jameendaar-किसान और जमींदार:-एक बार एक किसान अपने गाँव में ही जमींदार के पास जाता है और कहता है कि वह अपनी जमीन बेचना चाहता है | इस पर गाँव के जमींदार ने कहा भाई आप आपनी जमीन क्यों बेचना चाहते हो कितने रूपये में बेचना चाहते हो |

इस पर किसान ने उत्तर दिया जमींदार साहब मैं अपनी जमीन आपको पचास हज़ार रूपये में बेचना चाहता है (Hindi Kahani)| मुझे पैसे की जरुरत है इसलिए मैं इस जमीन को बेचना चाहता हूं |

अब जमींदार कहता है, चलो ठीक है मैं आपकी जमीन खरीदने के लिए तैयार हूं, लेकिन पहली बात तो यह कि मैं आपकी जमीन पचास हज़ार में नहीं बल्कि 2 लाख रूपये में खरीदूंगा, क्योंकि आपकी जमीन की कीमत मुझे पता है कम से कम 2 लाख है |

दूसरी बात यह है कि कम से कम आप मुझे जमीन बेचने के पीछे का कारण तो बताये | इस पर किसान व्यक्ति ने कहा अगले महीने मेरी बेटी का विवाह है | उसके विवाह के लिए मेरे पास पर्याप्त धन नहीं है इसी कारण से मैं अपनी जमीन को बेचना चाहता हूं |


जमींदार ने उत्तर दिया : किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर कम पैसे में किसी वस्तु को खरीदना बहुत बड़ा पाप है | और मुझे इस पाप का भागी नहीं बनना है | किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर प्राप्त किया गया धन कभी भी बरकत नहीं देता अपितु नाश का कारण ही बनता है | इसलिए मैं भी आपकी 2 लाख की जमीन को सिर्फ 50 हजार रूपये में खरीदकर पाप नहीं कमाना चाहता हूं |

जमींदार ने कहा : मैं और गाँव वाले मिलकर तुम्हारी बेटी के विवाह के लिए सहयोग करेंगे, तुम्हारे पास जब भी पर्याप्त पैसे हो जाये तो हमें पैसे वापिस दे देना |

और अगर फिर भी यदि तुम अपनी जमीन को बेचना ही चाहते हो तो मैं इसे इसकी उचित कीमत यानि 2 लाख रूपये में ही खरीदने के लिए तैयार हूं, जमींदार के मुख से ऐसा सुन किसान की आँखों से आंसू निकल पड़े और कहने लगा जैसा आप उचित समझे जमींदार साहब |

तो दोस्तों, किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर सस्ते पैसे में किसी वस्तु को प्राप्त करना व्यापार नहीं पाप है और ऐसा धन कभी भी आपको बरकत नहीं देता

Kisaan aur Jameendaar Story जमींदार और किसान की होशियार बेटी

बहुत समय पहले की बात है , किसी गाँव में एक किसान रहता था। उस किसान की एक बहुत ही सुन्दर
बेटी थी . दुर्भाग्यवश , गाँव के जमींदार से उसने बहुत सारा धनउधार लिया हुआ था। जमीनदार बूढा और


कुरूप था . किसान की सुंदर बेटी को देखकर उसने सोचा क्यूँ न कर्जे के बदले किसान के सामने उसकी बेटी से विवाह का प्रस्ताव रखा जाये जमींदार किसान के पास गया और उसने कहा – . तुम अपनी बेटी का विवाह मेरे साथ कर दो।

बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज माफ़ कर दूंगा . जमींदार की बात सुन कर किसान और किसान की बेटी के होश उड़ गए। तब जमींदार ने कहा – चलो गाँव की पंचायत के पास चलते हैं और जो निर्णय वे लेंगे उसे हम दोनों को ही मानना ​​होगा।

वो सब मिल कर पंचायत के पास गए और उन्हें सब कह सुनाया। उनकी बात सुन कर पंचायत ने थोडा सोच विचार किया और कहा – ये मामला बड़ा उलझा हुआ है अतः हम इसका फैसला किस्मत पर छोड़ते हैं .

जमींदार सामने पड़े सफ़ेद और काले रोड़ों के ढेर से एक काला और एक सफ़ेद रोड़ा उठाकर एक थैले में रख देगा फिर लड़की बिना देखे उस थैले से एक रोड़ा उठाएगी , और उस आधार पर उसके पास तीन विकल्प होंगे :

  1. अगर वो काला रोड़ा उठाती है तो उसे जमींदार से शादी करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्ज माफ़ कर दिया जायेगा।
  2. अगर वो सफ़ेद पत्थर उठती है तो उसे जमींदार से शादी नहीं करनी पड़ेगी और उसके पिता का कर्फ़ भी माफ़ कर दिया जायेगा ।
  3. . अगर लड़की पत्थर उठाने से मना करती है तो उसके पिता को जेल भेज दिया जायेगा

.पंचायत के आदेशानुसार जमींदार झुका और उसने दो रोड़े उठा लिए . जब वो रोड़ा उठा रहा था तो तब किसान की बेटी ने देखा कि उस जमींदार ने दोनों काले रोड़े ही उठाये हैं और उन्हें थैले में डाल दिया है लड़की इस स्थिति से घबराये बिना सोचनेलगी कि वो क्या कर सकती है ,

उसे तीन रास्ते नज़रआये :

  1. वह रोड़ा उठाने से मना कर दे और अपने पिता को जेल जाने दे ।
  2. सबको बता दे कि जमींदार दोनों काले पत्थर उठा कर सबको धोखा दे रहा हैं।
  3. वह चुप रह कर काला पत्थर उठा ले और अपने पिता को कर्ज से बचाने के लिए जमींदार से शादी करके अपना जीवन बलिदान कर दे।

उसे लगा कि दूसरा तरीका सही है , पर तभी उसे एक और भी अच्छा उपाय सूझा , उसने थैले में अपना हाथ डाला और एक रोड़ा अपने हाथ में ले लिया और बिना रोड़े की तरफ देखे उसके हाथ से फिसलने का नाटक किया। उसका रोड़ा

अब हज़ारों रोड़ों के ढेर में गिर चुका था और उनमे ही कहीं खो चुका था लड़की ने कहा – हे भगवान ! मैं कितनी बेवकूफ हूँ। लेकिन कोई बात नहीं । आप लोग थैले के अन्दर देख लीजिये कि कौन से रंग का रोड़ा बचा है ,

तब आपको पता चल जायेगा कि मैंने कौन सा उठाया था जो मेरे हाथ से गिर गया। थैले में बचा हुआ रोड़ा काला था , सब लोगों ने मान लिया कि लड़की ने सफ़ेद पत्थरही उठाया था । जमींदार के अन्दर इतना साहस नहीं था कि वो अपनी चोरी मान ले . लड़की ने अपनी सोच से असम्भव को संभव कर दिया। मित्रों ,

हमारे जीवन में भी कई बार ऐसी परिस्थितियां आ जाती हैं जहाँ सबकुछ धुंधला दीखता है , हर रास्ता नाकामयाबी की और जाता महसूस होता है पर ऐसे समय में यदि हम सोचने का प्रयास करें तो उस लड़की की तरह अपनी मुशिकलें दूर कर सकते हैं ।

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